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गरà¥à¤ को बचाà¤à¤‚ à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी से
जब à¤à¥à¤°à¥‚ण गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की जगह फेलोपियन टà¥à¥Ÿà¥‚ब या पेट में ठहर जाता है तो उसे à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी कहते हैं। जितनी जलà¥à¤¦à¥€ इस परेशानी का पता चल जाà¤, इलाज उतने बेहतर तरीके से संà¤à¤µ है। à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के...
गरà¥à¤ को बचाà¤à¤‚ à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी से
जब à¤à¥à¤°à¥‚ण गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की जगह फेलोपियन टà¥à¥Ÿà¥‚ब या पेट में ठहर जाता है तो उसे à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी कहते हैं। जितनी जलà¥à¤¦à¥€ इस परेशानी का पता चल जाà¤, इलाज उतने बेहतर तरीके से संà¤à¤µ है। à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पहलà¥à¤“ं के बारे में बता रहे हैं जय कà¥à¤®à¤¾à¤° सिंह
मां बनना à¤à¤• अदà¥à¤à¥à¤¤ à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ है। इसे शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में बयां नहीं किया जा सकता। लेकिन वो नौ महीने इतने आसान à¤à¥€ नहीं होते। हर दिन à¤à¤• नई परीकà¥à¤·à¤¾ व अनà¥à¤à¤µ होता है और हर पल à¤à¤• नई चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¥¤ शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ दौर में जहां मन मां बनने के खà¥à¤®à¤¾à¤° में रहता है, वहीं सपनों के बिखरने का डर बराबर बना रहता है। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान आई परेशानियां मन को तोड़ देती हैं। आज के समय में यह बात जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिक है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि हमारी लाइफ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² में बहà¥à¤¤ बदलाव आ चà¥à¤•ा है। सिगरेट, शराब आदि जैसी लत अब सिरà¥à¤« पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के शौक और शगल नहीं रहे, महिलाà¤à¤‚ à¤à¥€ इनका बेधड़क इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर रही हैं। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में आने वाली दिकà¥à¤•तें इसका à¤à¥€ परिणाम हैं। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान होने वाली परेशानियों में से à¤à¤• à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी है। हालांकि इसके लिठमहिलाओं की सिरà¥à¤« लाइफ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° नहीं है। कई दूसरे कारण à¤à¥€ हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ है à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी
डॉ. रेणॠचावला के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, à¤à¤¸à¤¾ गरà¥à¤ जो अपने सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ से हट कर अनà¥à¤¯ कहीं सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ हो जाता है, उसे à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी कहते हैं। वैसे गरà¥à¤ की निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ जगह तो गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ है, लेकिन कई बार यह गरà¥à¤ गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के बाहर ही ठहर जाता है। आमतौर पर देखने में आया है कि à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी सबसे अधिक फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब के अंदर होती है, लेकिन कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ मामले à¤à¥€ देखे गठहैं कि जब अंडा पेट के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में ही निषेचित हो जाता है। हालांकि इस तरह के गरà¥à¤ से अकसर गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो जाता है या कर दिया जाता है। लेकिन कई बार गरà¥à¤ का पूरा विकास à¤à¥€ हो जाता है, जो मां की जान के लिठबेहद खतरनाक है।
कà¥à¤¯à¤¾ है जोखिम
जब कà¤à¥€ अंडे का विकास फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब या पेट के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में होता है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ कराने की सलाह देते हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह जोखिम à¤à¤°à¤¾ हो सकता है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में इसका विकास फेलोपियन टय़ूब में हो जाता है, जिसकी वजह से फेलोपियन टय़ूब को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚च सकता है। फेलोपियन टय़ूब में फैलाव आने की वजह से पेट में तेज दरà¥à¤¦ और बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग हो सकती है। आंतरिक बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग à¤à¥€ हो सकती है, जिसे नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में महिला की जान जा सकती है। डॉ. रेणॠचावला के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• हालांकि à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी का जलà¥à¤¦ पता लगाना थोड़ा मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह काफी हद तक सामानà¥à¤¯ गरà¥à¤ की तरह लगता है। लेकिन इसके कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ हैं, जिनकी सहायता से इसे पहचाना जा सकता है :
किसे है सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जोखिम
à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी किसी à¤à¥€ महिला को हो सकती है, लेकिन कà¥à¤› महिलाओं में इसकी आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। 35 वरà¥à¤· से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उमà¥à¤° की महिलाà¤à¤‚, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पेडू में सूजन की बीमारी हो, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहले à¤à¥€ à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• गरà¥à¤ रह चà¥à¤•ा हो, जिनका बांà¤à¤ªà¤¨ का इलाज चल रहा हो और जो महिलाà¤à¤‚ धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ करती हैं, उनमें यह दिकà¥à¤•त जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है।
इलाज संà¤à¤µ है
à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी का इलाज महिला की शारीरिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर निरà¥à¤à¤° करता है। इसके अलावा यह इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि गरà¥à¤ कहां ठहरा है और à¤à¥à¤°à¥‚ण कितना बड़ा हो चà¥à¤•ा है। यदि शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ दौर में ही इसका पता लगा लिया जाठतो इंजेकà¥à¤¶à¤¨ की सहायता से इसके विकास को रोका जा सकता है। यदि à¤à¥à¤°à¥‚ण काफी बड़ा हो गया है तो उसे लैपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक सरà¥à¤œà¤°à¥€ की सहायता से निकाला जा सकता है।
जलà¥à¤¦ पता लगाना है समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€
à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के बारे में जितनी जलà¥à¤¦à¥€ पता लग जाà¤, उसका खतरा उतना ही कम हो जाता है। किसी à¤à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी को लंबे समय के लिठनहीं रखा जा सकता। यदि इसे लंबे समय तक छोड़ा गया तो फेलोपियन टय़ूब को नà¥à¤•सान हो सकता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में जितनी जलà¥à¤¦à¥€ अंडाणॠको बाहर निकाला जाà¤à¤—ा, वह उतना ही सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ होगा। इससे रोगी को और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में उसके गरà¥à¤ को à¤à¥€ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ किया जा सकता है।
à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के लकà¥à¤·à¤£
दरà¥à¤¦ और बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग। आमतौर पर मासिक धरà¥à¤® के दौरान होनेवाले रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤µ व दरà¥à¤¦ से यह थोड़ा अलग होगा। पीरियडà¥à¤¸ में देरी, गाढ़ा लाल या कम लाल, पानी जैसा रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤µ होना इसके लकà¥à¤·à¤£ हैं।
पेडू और उदर में दरà¥à¤¦à¥¤ यहां तक कि कंधों और गले के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में दरà¥à¤¦ होना।
आलस और कमजोरी लगना।
रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कम होना।
पीठके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦ होना।
शरीर पीला पड़ जाना।
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